कवि दुष्यंत कुमार का जीवन परिचय | Dushyant Kumar Biography In Hindi
साहित्य सेवा :
अत्याधुनिक काल में सामाजिक यथार्थ के चित्रण में दुष्यन्त कुमार की Dushyant Kumar Biography In Hindi गजलों का अपना महत्वपूर्ण स्थान है। वे बिना लाग लपेट के अपने समय और अपने समाज की तीखी आलोचना करते रहे हैं। उनकी कविता में यथार्थ से जूझने की शक्ति है। वे मानते हैं कि परिस्थितियाँ यद्यपि अनुकूल नहीं है; किन्तु इसमें परिवर्तन की तो हमें हिम्मत जुटानी ही पड़ेगी।
प्रारंभिक जीवन एवं परिवार | Dushyant Kumar Family
महान गज़लकार दुष्यंत कुमार का जन्म 1 सितम्बर 1933 को माना जाता है. लेकिन दुष्यन्त साहित्य के मर्मज्ञ विजय बहादुर सिंह के अनुसार इनकी वास्तविक जन्मतिथि 27 सितंबर 1931 है. इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद की तहसील नजीबाबाद के ग्राम राजपुर नवादा में हुआ. इनका पूरा नाम दुष्यंत कुमार त्यागी था. उनकी प्रारम्भिक शिक्षा नहटौर, जनपद-बिजनौर में हुई. उन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा एन.एस.एम. इन्टर कॉलेज चन्दौसी, मुरादाबाद से उत्तीर्ण की. उच्च शिक्षा के लिए 1954 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए.की डिग्री प्राप्त की. अपनी कॉलेज की शिक्षा के समय 1949 में उनका विवाह राजेश्वरी से हुआ. वास्तविक जीवन में दुष्यंत बहुत, सहज, सरल और मनमौजी व्यक्ति थे.
दुष्यंत कुमार का कार्यक्षेत्र
दुष्यंत कुमार ने कक्षा दसवीं से ही कविता लिखना प्रारंभ कर दिया था. प्रारम्भ में वे परदेशी के नाम से लेखन करते थे. 1958 में उन्होंने आकाशवाणी, दिल्ली में पटकथा लेखक के रूप में कार्य किया. 1960 में वे सहायक निर्देशक के पद के रूप में उन्नत होकर आकाशवाणी, भोपाल आ गए. आकाशवाणी के बाद वे मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग के अंतर्गत भाषा विभाग में रहे. इस दौरान आपातकाल के समय उनका कविमन अत्यंत क्षुब्ध और आक्रोशित हो उठा जिसकी अभिव्यक्ति उनके द्वारा कुछ कालजयी ग़ज़लों के रूप में हुई.
संकलित गजलों में उनका वह स्वर जीवन के प्रति गहन आस्था जगाने वाला है। अपने समय की भयावह स्थिति को व्यक्त करने वाली दुष्यन्त की इन गजलों में सामान्य जन की पीड़ा और स्शमान्य-जन की जिजीविषा का प्रभावशाली भाषा में चित्रण किया गया है।
कवि दुष्यंत कुमार का जीवन परिचय | Dushyant Kumar Biography In Hindi
बिंदु (Points) | जानकारी (Information) |
नाम (Name) | दुष्यंत कुमार त्यागी |
जन्म (Date of Birth) | 1 सितम्बर 1933 |
आयु | 42 वर्ष |
जन्म स्थान (Birth Place) | ग्राम राजपुर नवादा, उत्तरप्रदेश |
पिता का नाम (Father Name) | चौधरी भगवत सहाय |
माता का नाम (Mother Name) | राजकिशोरी देवी त्यागी |
पत्नी का नाम (Wife Name) | राजेश्वरी कौशिक |
पेशा (Occupation ) | लेखक, कवि |
बच्चे (Children) | ज्ञात नहीं |
मृत्यु (Death) | 30 दिसम्बर 1975 |
मृत्यु स्थान (Death Place) | —- |
प्रसिद्धि | गज़ल |
• रचनाएँ :
दुष्यन्त कुमार द्वारा रचित उनकी कृतियाँ निम्नलिखित हैं-
(1) काव्य संकलन- (1) सूर्य का स्वागत, (2) आवाजों के घेरे।
(2) गीति नाट्य-एक कण्ठ विषपायी।
(3) उपन्यास- (1) छोटे-छोटे सवाल, (2) आँगन में एक वृक्ष, (3) दुहरी जिन्दगी।
4) गजल संग्रह-साये में धूप।
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कविताएं–
- मुक्तक
- आज सड़कों पर लिखित हैं
- मत कहो, आकाश में
- धूप के पाँव
- गुच्छे भर अमलतास
- सूर्य का स्वागत
- कहीं पेन्स की चादर
- बाढ़ की संभावना
- यह नदी की धार में
- हो गया है पीर पर्वत-सी
- किसी रेल सी गुज़रती है
- कहाँ तो तय था
- कैसे मनेर
- खंडहर बचे हुए हैं
- जो शहतीर है
- ज़िंदगानी का कोई उद्देश्य नहीं
- आवाजों के घेरे
- जलते हुए वन का वसन्त
- आज सड़कों पर
- आग जलती रही
- एक आशीर्वाद
- आग जालनी चाहिए
- मापदण्ड बदलो
उपन्यास–
- छोटे-छोटे सवाल
- आँगन में एक वृक्ष
- दुहरी ज़िंदगी
एकांकी–
- मन के कोण
नाटक–
- और मसीहा मर गया
गज़ल-संग्रह–
- साये में धूप
- आदमी की पीर
- आग जलनी चाहिए
दुष्यन्त कुमार त्यागी ने अपनी साहित्य सृजन की यात्रा सन् 1957 ई. में प्रारम्भ की और सन् 1975 ई. में ‘साये में धूप’ गजल संग्रह की सम्पूर्ति के साथ ही अपनी जीवन यात्रा को विराम दे दिया। अपार ख्याति प्राप्त दुष्यन्त जी अपनी कृतियों के साथ ही अमर हो गए हैं और युवा पीढ़ियों के लिए चिरन्तन प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।
• भाव पक्ष :
(1) गहन व सूक्ष्म अनुभूतियाँ- दुष्यन्त कुमार जी की कविता में भाव की अनुभूति गहन और सूक्ष्म दोनों ही हैं। इन अनुभूतियों से व्यवहार पद्म को समझने में आसानी होती है। उनकी गजलें स्पष्ट कर देती हैं कि उनके ऊपर मनोविश्लेषणवाद का प्रभाव अवश्य ही रहा है।
(2) प्रेम और सौन्दर्य- इनकी गजलों में प्रेम और सौन्दर्य को धरती के ठोस धरातल पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
(3) छायावादी रहस्यवाद- कवि के ऊपर बीते छायावादी युगीन रहस्यवाद का प्रभाव दिखाई पड़ता है।
(4) निराशा उद्विग्नता का भाव- कवि छायावादी लगता है जिसमें घोर निराशा भरने वाली भावना अपनी गजलों में प्रतीक बनकर उभरती है। द्रष्टव्य है-
“ऐसा लगता है कि उड़कर भी कहाँ पहुँचेंगे, हाथ में जब कोई टूटा हुआ ‘पर’ होता है।”
तथा “गजब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते, वो सब के सब परेशां हैं, वहाँ पर क्या हुआ होगा।”
कवि यथार्थ की अनुभूति के भय से भी टूटा हुआ दिखता है।
(5) रस- शान्त रस का प्रयोग है।
• कला पक्ष :
(1) भाषा- दुष्यन्त कुमार त्यागी अपनी कविताओं में भाव के अनुकूल भाषा का प्रयोग करते हैं। इस कारण उसमें तत्सम, तद्भव, देशज अनुकूल चयन किया है। भाषा में सहजता है। , विदेशी सभी प्रकार के शब्दों का अवसर है
(2) छन्द- इनकी कविताएँ अधिकतर छन्द के बन्धन से मुक्त हैं।
(3) शैली- कवि ने अपनी कविता में व्यंग्यात्मक मुक्तक शैली को अपनाया है। प्रत्येक छन्द अपनी भावभूमि के अर्थ के लिए स्वतंत्र होता है। उनकी व्याख्या परस्पर सम्बद्ध नहीं होती।
(4) अलंकार- अलंकारों का प्रयोग सप्रयास नहीं किया गया है। अपने आप ही उपमा रूपक, उत्प्रेक्षा शामिल हो गये हैं।
काव्य-धर्म का मर्म-दुष्यन्त जी कविता को राजनीतिक, सामाजिक एवं व्यक्तिगत स्तर पर लड़ाई का हथियार स्वीकार करते हैं। उनके व्यंग्यों में हास्य की अपेक्षा आक्रोश की प्रबलता है। दुष्यन्त कुमार की कविता का मूल स्वर आम आदमी है।
• साहित्य में स्थान :
दुष्यन्त कुमार की गजलें जन-जन तक पहुँचती हैं। उन्होंने गजल की उर्दू परम्परा को एक मोड़ देते हुए हिन्दी को समृद्ध किया है तथा कवियों को एक नई जमीन और नई दिशा प्रदान की है। समग्र रूप से अपने इस महान योगदान के लिए हिन्दी साहित्य चिर ऋणी रहेगी।
दुष्यंत कुमार की कविता की प्रसिद्ध पंक्तियां–
“हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए.
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए.
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए.
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए.”
दुष्यंत कुमार की प्रमुख गज़ल | Dushyant Kumar Gazal
- कहा तो तै था, चिरागां हरेक घर के लिए,
कहां चिराग मयस्सर नही, शहर के लिए .
- आम आदमी बदहाली में जीने की विवशता झेल रहा है:न हो तो कमीज तो पांवों से पेट ढक लेंगे,
ये लोग कितने मुनासिब है, इस सफर के लिए .
- आजादी के बाद हम अपनी संस्कृति को भूलकर शोषण की तहजीब को आदर्श मानने लगे हैं,
अब नयी तहजीब की पेशे नजर हम, आदमी को भूनकर खाने लगे हैं .
- कल की नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है .
वैवाहिक जीवन
दुष्यंत जी का अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान ही ‘राजेश्वरी’ जी से विवाह हुआ था। इसके बाद दोनों ने विवाहोपरांत साथ मिलकर बी.ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। अपने दांपत्य जीवन में उन्होंने तीन संतानों को जन्म दिया। उनके दो पुत्र और एक पुत्री थी।
पुरस्कार एवं सम्मान
हिंदी गजल विधा के पुरोधा दुष्यंत कुमार के सम्मान में भारतीय डाक विभाग ने एक डाक टिकट जारी किया था। इसके साथ ही ‘दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय’ (Dushyant Kumar Smarak Pandulipi Sangrahalaya) में उनकी धरोहरों को सँभालने का प्रयास किया गया है।
मृत्यु (Dushyant Kumar Death)
दुष्यंत कुमार की मृत्यु 30 दिसम्बर 1975 को मात्र 42 वर्ष की उम्र में हुई. इतनी कम उम्र में उन्होंने अनेक काव्य, गजल, नाटक, कविता, उपन्यास आदि की रचना कर हिंदी साहित्य में अपना अमूल्य योगदान दिया. तथा इनकी गजल एवं कविताओं ने इन्हें साहित्य में अमर कर दिया.
FAQs
दुष्यंत कुमार का मूल नाम क्या था?
दुष्यंत कुमार का मूल नाम दुष्यंत कुमार त्यागी था।
दुष्यंत कुमार का जन्म कहाँ हुआ था?
दुष्यंत कुमार का जन्म 1 सितंबर 1931 को उत्तर-प्रदेश के बिजनौर जिले के राजपुर नवादा गांव में हुआ था।
दुष्यंत कुमार की पत्नी का क्या नाम था?
दुष्यंत कुमार की पत्नी का नाम राजेश्वरी था।
दुष्यंत कुमार के गजल संग्रह का क्या नाम है?
बता दें कि ‘साये में धूप’ उनका लोकप्रिय गजल संग्रह है।
दुष्यंत कुमार का निधन कब हुआ था?
दुष्यंत कुमार का मात्र 42 वर्ष की आयु में ह्रदय गति रुक जाने से उनका 30 दिसंबर 1975 का निधन हो गया था।
साये में धूप (गजल संग्रह) छोटे-छोटे सवाल और आँगन में एक वृक्ष (उपन्यास) उनकी प्रमुख रचना है।